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5 OCT 2026 · राजनीति

Form 6 विवाद में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘हमने किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी’, ECI के दावे पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026। मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है।

cec gyanesh kumar on form 6

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी संकेत दिया कि जब निर्वाचन आयोग रिकॉर्ड पेश करेगा तो अदालत यह देखना चाहेगी कि आखिर Form 6 में बदलाव किसने किया और किस स्तर पर किया गया।

इस टिप्पणी का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा था कि SIR के दौरान Form 6 के साथ जो अतिरिक्त declaration जोड़ा गया था, उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन प्राप्त था। अब अदालत की ताजा टिप्पणी ने इस दावे की व्याख्या पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आखिर Form 6 को लेकर विवाद क्या है?

Form 6 कोई सामान्य प्रशासनिक कागज नहीं है। यह वह वैधानिक आवेदन है जिसके जरिए पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करता है।

मौजूदा विवाद उस ऑनलाइन Form 6 से जुड़ा है, जिसमें SIR के दौरान एक अतिरिक्त declaration दिखाई दिया। इस declaration में आवेदक से पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान अपने या अपने माता-पिता के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।

यानी नए मतदाता को केवल अपनी पहचान और पात्रता की जानकारी देने तक सीमित रहने के बजाय पुराने electoral roll से जुड़े सवालों का भी जवाब देना था।

यहीं से सवाल उठा कि क्या इस तरह की अतिरिक्त जानकारी मांगने के लिए वैधानिक Form 6 में बदलाव किया गया था और यदि किया गया था तो उस बदलाव की कानूनी प्रक्रिया क्या थी?

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ECI का कहना क्या है?

निर्वाचन आयोग की ओर से सामने आए स्पष्टीकरण के मुताबिक, मूल Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था। आयोग का तर्क है कि SIR के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त declaration जोड़ा गया था और इसे मूल statutory form में संशोधन नहीं माना जाना चाहिए।

5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद भी आयोग के अधिकारियों ने इसी स्थिति को दोहराया। उनके मुताबिक Form 6 में एक भी शब्द या विराम चिह्न नहीं बदला गया, बल्कि SIR के लिए एक अतिरिक्त declaration जोड़ा गया था।

यही वह बिंदु है जिस पर अब पूरा विवाद केंद्रित है—क्या अतिरिक्त declaration जोड़ना महज एक प्रशासनिक व्यवस्था थी या फिर इसका प्रभाव इतना महत्वपूर्ण था कि इसे Form 6 में वास्तविक बदलाव माना जाना चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई के फैसले में क्या कहा था?

यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को बिहार में SIR को लेकर अपने फैसले में निर्वाचन आयोग की SIR कराने की शक्ति और चुनावी सूची की शुद्धता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया था। अदालत ने electoral rolls की सटीकता और विश्वसनीयता को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद से जोड़ा था।

लेकिन मौजूदा Form 6 declaration बाद में जोड़ा गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह अतिरिक्त declaration जुलाई 2026 के आसपास ऑनलाइन Form 6 में दिखाई दिया। इसलिए 27 मई के फैसले को सीधे तौर पर उस बाद के बदलाव की विशिष्ट न्यायिक मंजूरी मानना सवालों के घेरे में है।

यही अंतर सोमवार की सुनवाई के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में है।

कानून Form 6 के बारे में क्या कहता है?

Form 6 का संबंध Registration of Electors Rules, 1960 से है। इन नियमों का आधार Representation of the People Act, 1950 है।

कानून की धारा 28 के तहत नियम बनाने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है। इसमें चुनावी सूचियों और मतदाता पंजीकरण से जुड़े मामलों के लिए नियम बनाए जाने का प्रावधान है।

2022 में नियमों में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि नया मतदाता बनने के लिए आवेदन Form 6 में किया जाएगा।

इसी कानूनी ढांचे के कारण विवाद का एक अहम सवाल यह है कि यदि Form 6 में वास्तव में कोई वैधानिक बदलाव किया गया, तो क्या उसके लिए संबंधित नियमों में औपचारिक संशोधन और अधिसूचना जरूरी थी?

यह प्रश्न अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है और अदालत के समक्ष रिकॉर्ड आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

'किसने बदला?' अब यही सवाल सबसे अहम

सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की टिप्पणी ने बहस को केवल इस बात से आगे बढ़ा दिया है कि Form 6 में क्या बदला।

अब सवाल यह भी है कि बदलाव किसने कराया, किस आदेश या प्रक्रिया के तहत कराया और उस बदलाव का आधार क्या था।

इसीलिए अदालत ने रिकॉर्ड सामने आने पर यह देखने की बात कही कि Form 6 को किसने संशोधित किया था।

यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले सामने आई रिपोर्टों में निर्वाचन आयोग के भीतर ही Form 6 से जुड़े बदलावों को लेकर आपत्तियों का जिक्र किया गया था। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने अगस्त में ऑनलाइन Form 6 में किए गए बदलाव को ‘unauthorised’ और ‘illegal’ बताते हुए इसे हटाने की बात कही थी।

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क्या इससे SIR की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा हो गया?

सोमवार की सुनवाई का केंद्र Form 6 में कथित बदलाव और उसे लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से किए गए दावे थे। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी SIR प्रक्रिया को अवैध घोषित कर दिया है।

बल्कि मौजूदा विवाद में दो अलग-अलग मुद्दों को अलग रखना जरूरी है—

पहला, निर्वाचन आयोग की SIR कराने की संवैधानिक और वैधानिक शक्ति।

दूसरा, SIR के दौरान मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए गए Form 6 में अतिरिक्त declaration जोड़ने की प्रक्रिया और उसका कानूनी आधार।

सुप्रीम कोर्ट के 27 मई के फैसले ने SIR की वैधानिकता और आयोग की शक्तियों पर विचार किया था, जबकि 5 अक्टूबर की सुनवाई ने बाद में सामने आए Form 6 के बदलाव को लेकर अलग सवाल खड़ा किया है।

नए मतदाताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Form 6?

Form 6 सीधे उन नागरिकों से जुड़ा है जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करते हैं।

ऐसे में यदि आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त दस्तावेज, घोषणा या पुरानी मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है, तो इसका असर नए मतदाताओं पर पड़ सकता है।

यही कारण है कि Form 6 का विवाद केवल तकनीकी या प्रशासनिक मामला नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल भी है कि एक पात्र नागरिक के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया कितनी सरल, पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए।

ECI और सुप्रीम कोर्ट के रुख में अंतर कहां दिख रहा है?

पूरे विवाद को सरल भाषा में समझें तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है:

  • ECI का पक्ष: मूल Form 6 में बदलाव नहीं किया गया; SIR के दौरान अतिरिक्त declaration जोड़ा गया था।

  • सुप्रीम कोर्ट की 5 अक्टूबर की टिप्पणी: अदालत ने कहा कि उसने किसी modified Form 6 को मंजूरी नहीं दी।

  • मुख्य कानूनी सवाल: क्या अतिरिक्त declaration को Form 6 का संशोधन माना जाए और उसे लागू करने के लिए किस वैधानिक प्रक्रिया की जरूरत थी?

  • अगला महत्वपूर्ण कदम: निर्वाचन आयोग द्वारा रिकॉर्ड पेश किए जाने के बाद यह स्पष्ट होना कि बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

इन बिंदुओं का जवाब आगे की न्यायिक कार्यवाही में सामने आना बाकी है।

मामला अब सिर्फ एक फॉर्म का नहीं

Form 6 विवाद ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही और मतदाता अधिकारों से जुड़े बड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है।

चुनावी सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहली सीढ़ी है। अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो मतदान का अधिकार व्यवहार में उसके लिए अर्थहीन हो जाता है। इसलिए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले हर दस्तावेज और हर अतिरिक्त शर्त का स्पष्ट कानूनी आधार होना महत्वपूर्ण है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि Form 6 से जुड़ा अतिरिक्त declaration किस प्रक्रिया से आया और उसे सुप्रीम कोर्ट के मई के फैसले से जोड़ने का आधार क्या था।

सुप्रीम कोर्ट की 5 अक्टूबर की टिप्पणी के बाद अब इस सवाल का जवाब केवल राजनीतिक बहस से नहीं, बल्कि आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक जांच से सामने आने की उम्मीद है।

Frequently asked questions

आखिर Form 6 को लेकर विवाद क्या है?
Form 6 कोई सामान्य प्रशासनिक कागज नहीं है। यह वह वैधानिक आवेदन है जिसके जरिए पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करता है।
ECI का कहना क्या है?
निर्वाचन आयोग की ओर से सामने आए स्पष्टीकरण के मुताबिक, मूल Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था। आयोग का तर्क है कि SIR के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त declaration जोड़ा गया था और इसे मूल statutory form में संशोधन नहीं माना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई के फैसले में क्या कहा था?
यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है।
कानून Form 6 के बारे में क्या कहता है?
Form 6 का संबंध Registration of Electors Rules, 1960 से है। इन नियमों का आधार Representation of the People Act, 1950 है।
क्या इससे SIR की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा हो गया?
सोमवार की सुनवाई का केंद्र Form 6 में कथित बदलाव और उसे लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से किए गए दावे थे। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी SIR प्रक्रिया को अवैध घोषित कर दिया है।
नए मतदाताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Form 6?
Form 6 सीधे उन नागरिकों से जुड़ा है जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करते हैं।