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29 SEP 2026 · राजनीति

पूर्व IAS दिव्या मित्तल का बड़ा ऐलान, राजनीति में उतरेंगी, बोलीं- किसी पार्टी के साथ नहीं

लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने अगले कदम को लेकर चल रहे सस्पेंस को खत्म कर दिया है। 29 सितंबर को जारी वीडियो संदेश में उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने का ऐलान किया। दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू होगी, लेकिन वह फिलहाल किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेंगी।

पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया

करीब 10 मिनट के वीडियो संदेश में उन्होंने प्रशासनिक सेवा के अपने अनुभवों और आम लोगों की समस्याओं का जिक्र किया। शिक्षा, परीक्षा में अनियमितता, रोजगार, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जवाबदेही जैसे मुद्दे उनके संदेश के केंद्र में रहे।

पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर 2026 को राजनीति में प्रवेश करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि उनकी राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू होगी और फिलहाल वह किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी। उन्होंने जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करने की बात कही है।

'आगे क्या? राजनीति'—दिव्या मित्तल ने खत्म किया सस्पेंस

IAS से इस्तीफे के बाद से ही दिव्या मित्तल के अगले कदम को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। सोशल मीडिया पर उन्होंने पहले संकेत दिया था कि 29 सितंबर को वह अपनी भविष्य की रणनीति के बारे में जानकारी देंगी।

इसके बाद उनके राजनीति में आने की संभावना को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि मंगलवार को जारी वीडियो में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह राजनीति में कदम रखने जा रही हैं।

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं जिनकी शिकायतें व्यवस्था तक पहुंच नहीं पातीं या पहुंचने के बावजूद उनका समाधान नहीं हो पाता।

दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार सरकार की योजनाओं के लिए पैसा, नियम और मंजूरी मौजूद होती है, लेकिन इसके बावजूद जमीन पर काम नहीं हो पाता। उनके अनुसार ऐसी स्थिति में सवाल केवल संसाधनों का नहीं बल्कि व्यवस्था और जवाबदेही का भी है।

किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी दिव्या मित्तल

दिव्या मित्तल के ऐलान का सबसे अहम हिस्सा यह है कि उन्होंने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की बात नहीं कही है।

उन्होंने संकेत दिया कि वह किसी स्थापित पार्टी के झंडे के नीचे अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर अपना मंच तैयार करना चाहती हैं।

उनके संदेश में जाति, धर्म, पैसा और बाहुबल जैसी पारंपरिक राजनीतिक धारणाओं से अलग व्यवस्था बनाने की बात भी सामने आई है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनका प्रस्तावित राजनीतिक मंच किस औपचारिक स्वरूप में सामने आएगा। वह राजनीतिक दल बनाएंगी या जन-अभियान के रूप में शुरुआत करेंगी, इस बारे में भी फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

प्रशासनिक अनुभव को राजनीति से जोड़ने की कोशिश

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में प्रशासनिक सेवा के दौरान सामने आए कई मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने ऐसे स्कूल का उदाहरण दिया जिसे मंजूरी और संसाधन मिलने के बावजूद लंबे समय तक बनाया नहीं जा सका।

उन्होंने जमीन से जुड़े एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें पात्र व्यक्ति को जमीन का कब्जा नहीं मिल पाने की बात कही गई।

इसके अलावा उन्होंने खराब सड़कों, अधूरे विकास कार्यों और सरकारी व्यवस्था में होने वाली देरी जैसे मुद्दों को भी उठाया।

उनका कहना है कि यदि किसी विकास कार्य के लिए पैसा, नियम और प्रशासनिक मंजूरी मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद काम नहीं हो रहा है तो समस्या केवल फंड या संसाधनों की नहीं है। व्यवस्था में मौजूद खामियों और जवाबदेही की कमी पर भी सवाल उठना चाहिए।

युवाओं और रोजगार को लेकर भी उठाए सवाल

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि देश के लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा के जरिए अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन व्यवस्था में आने वाली अनिश्चितताओं का सीधा असर उनके करियर पर पड़ता है।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दौर में बदलती नौकरियों और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों की ओर भी ध्यान खींचा।

इससे संकेत मिलता है कि युवा, शिक्षा और रोजगार उनके प्रस्तावित राजनीतिक अभियान के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी उन्होंने कोई विस्तृत राजनीतिक घोषणापत्र या नीति दस्तावेज जारी नहीं किया है।

'मुझे अपने देश की आजादी के 80 साल का हिसाब चाहिए'

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में देश की आजादी के 80 वर्षों के बाद विकास और व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने स्कूल, सड़क, जमीन, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों को सामने रखते हुए व्यवस्था से जवाबदेही की मांग करने की बात कही।

उनके संदेश का एक प्रमुख हिस्सा यह रहा कि आम लोगों की समस्याओं को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक समाधान जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

हालांकि उनके वीडियो में बताए गए व्यक्तिगत प्रशासनिक अनुभवों और उदाहरणों को उनके स्वयं के अनुभव और दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। 

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