मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बख्शी का तालाब तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, राहत सामग्री वितरित की और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने फैजुल्लागंज से नैमिष तक हवाई सर्वे कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति भी देखी।
बाढ़ से बचाव के साथ रास्ते का भी होगा इस्तेमाल
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रस्तावित तटबंध को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके लिए धनराशि जारी कर मानसून समाप्त होने के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
तटबंध को इस तरह विकसित करने की योजना है कि भविष्य में गोमती का जलस्तर बढ़ने पर आसपास की आबादी को बाढ़ से सुरक्षा मिल सके। इसके साथ ही तटबंध पर रास्ता होने से क्षेत्र में आवागमन भी आसान होगा।
सिंचाई विभाग को फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती के किनारे सर्वे कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जलभराव रोकने के लिए लगेंगे पंपिंग सेट
बाढ़ से निपटने की योजना सिर्फ तटबंध बनाने तक सीमित नहीं रहेगी। तटबंध के बाहर बारिश का पानी जमा न हो, इसके लिए पंपिंग सेट लगाने की व्यवस्था भी की जाएगी।
नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में आबादी वाले क्षेत्रों में जमा पानी को पंपिंग सेट के जरिए नदी की ओर निकालने की व्यवस्था की जाएगी। इससे बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर दोनों के कारण होने वाले जलभराव से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आखिर गोमती का जलस्तर क्यों बढ़ा?
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में हुई भारी बारिश का असर कुछ दिनों बाद गोमती के जलस्तर पर दिखाई दिया।
पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और नेपाल क्षेत्र में हुई बारिश का पानी करीब पांच से छह दिन बाद नीचे की ओर पहुंचा। इसके चलते गोमती का जलस्तर बढ़ा और बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर तथा फैजुल्लागंज से नैमिष तक के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की जा रही है।
बाढ़ पीड़ित परिवारों को 26 जरूरी सामान
प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। राहत पैकेट में 26 जरूरी वस्तुएं शामिल की गई हैं।
इनमें चावल, आटा, आलू, अरहर दाल, तेल, नमक, मसाले, तिरपाल, बाल्टी, लाई-भुजा, मोमबत्ती, माचिस और बरसाती समेत रोजमर्रा की जरूरत का सामान शामिल है।
एक राहत पैकेट में 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल और एक लीटर तेल समेत अन्य सामग्री दी जा रही है।
राहत शिविरों में मिलेगा गर्म खाना और बच्चों के लिए दूध
मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से खुले में रहने के बजाय प्रशासन की ओर से बनाए गए राहत शिविरों में जाने की अपील की। इन शिविरों को स्कूलों और मैरिज हॉल में बनाया जा रहा है।
राहत शिविरों में दोनों समय गर्म भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। छोटे बच्चों के लिए दूध और गर्भवती महिलाओं के लिए पोषक आहार की व्यवस्था की जाएगी।
पशुओं के लिए सूखा भूसा और चोकर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जनहानि पर मिलेगा 4 लाख रुपये का मुआवजा
मुख्यमंत्री ने बाढ़ के दौरान होने वाली जनहानि के मामलों में तत्काल आर्थिक सहायता देने की बात कही। बाढ़ में डूबने या आकाशीय बिजली से मृत्यु होने पर परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
बारिश या बाढ़ में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
इसके अलावा पशुहानि की भरपाई और फसलों के नुकसान का सर्वे कर किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने की व्यवस्था की जाएगी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी नजर
बाढ़ के दौरान सांप और दूसरे जहरीले जीवों का खतरा बढ़ने को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कुत्ते या अन्य जानवर के काटने की स्थिति में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराने को कहा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल और पशु चिकित्सा शिविर भी लगाए जाएंगे।
राहत शिविरों में बिजली की समस्या होने पर पेट्रोमैक्स और सोलर लाइट की व्यवस्था की जाएगी।
राहत शिविरों में पहुंचे परिवारों के घरों की भी होगी सुरक्षा
बाढ़ के कारण जिन परिवारों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में जाना पड़ेगा, उनके घरों और संपत्ति की सुरक्षा के लिए भी इंतजाम किए जाएंगे।
गांव के चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी और पुलिसकर्मी रात के समय प्रभावित गांवों में गश्त करेंगे, ताकि खाली पड़े घरों में चोरी या अन्य घटनाओं को रोका जा सके।
राजनाथ सिंह ने भी फोन पर ली बाढ़ की जानकारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार सुबह फोन कर लखनऊ और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, फैजुल्लागंज से नैमिष तक प्रस्तावित तटबंध से भविष्य में क्षेत्र को बाढ़ की समस्या से राहत दिलाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि तटबंध को मंजूरी दी जा चुकी है और निर्माण के लिए धनराशि जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
तटबंध से बदल सकती है इलाके की तस्वीर
फैजुल्लागंज से नैमिष तक प्रस्तावित तटबंध को केवल बाढ़ नियंत्रण परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके साथ रास्ता विकसित किए जाने की योजना इसे बाढ़ सुरक्षा और क्षेत्रीय आवागमन—दोनों के लिए उपयोगी आधारभूत ढांचे में बदल सकती है।
फिलहाल गोमती के बढ़े जलस्तर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। सरकार का तत्काल फोकस प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा नुकसान का आकलन करने पर है। वहीं, लंबे समय के समाधान के तौर पर तटबंध निर्माण की योजना पर काम आगे बढ़ाया जाएगा।
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