नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। करीब पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने गंभीर फिल्मों से लेकर कॉमेडी और एक्शन तक लगभग हर तरह के किरदार निभाए। 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्निसाक्षी', 'अब तक छप्पन', 'राजनीति' और 'वेलकम' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने लंबे समय तक याद रखा।
कैसे हुआ नाना पाटेकर का निधन?
सामने आई शुरुआती जानकारी के मुताबिक नाना पाटेकर को गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर बेहोशी की हालत में पाया गया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका।
ABP Live की रिपोर्ट के मुताबिक, नाना पाटेकर को सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। शुरुआती चिकित्सकीय जानकारी में कार्डियक अरेस्ट को मौत की वजह बताया गया है। अस्पताल में करीब 45 मिनट तक CPR देने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जानी थी।
फिलहाल निधन की परिस्थितियों को लेकर अंतिम आधिकारिक मेडिकल निष्कर्ष का इंतजार किया जा रहा है।
अचानक आई खबर से सदमे में फिल्म इंडस्ट्री
नाना पाटेकर के निधन की खबर ऐसे समय आई है जब वह अब भी फिल्मों से पूरी तरह दूर नहीं हुए थे। हाल के वर्षों में उन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर भी अलग-अलग तरह के किरदार स्वीकार किए। 2024 की 'वनवास', 2025 की 'हाउसफुल 5' और 2026 में 'ओ' रोमियो' तथा 'सुबेदार' जैसी फिल्मों से उनका नाम जुड़ा रहा।
यही वजह है कि उनके निधन की खबर को उनके प्रशंसकों के लिए अचानक और बेहद भावुक कर देने वाली खबर माना जा रहा है। नाना पाटेकर का फिल्मी कैरियर अलग अलग तरह के किरदारों से भरा पड़ा है।
'परिंदा' से 'क्रांतिवीर' तक, अभिनय का ऐसा अंदाज जो अलग था
नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खासियत उनकी संवाद अदायगी और किरदार को भीतर तक पकड़ लेने की क्षमता थी। वह संवाद बोलते समय सिर्फ शब्दों पर निर्भर नहीं रहते थे। उनके चेहरे के भाव, आवाज में उतार-चढ़ाव और शरीर की भाषा मिलकर किरदार को एक अलग पहचान देते थे।
'परिंदा' में उनके अभिनय ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इसके बाद 'क्रांतिवीर' ने उनके करियर को एक नई ऊंचाई दी। फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
'अग्निसाक्षी', 'खामोशी: द म्यूजिकल', 'अब तक छप्पन' और 'राजनीति' जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि नाना पाटेकर किसी एक तरह की भूमिका तक सीमित रहने वाले अभिनेता नहीं थे।
गंभीर भूमिकाओं के साथ कॉमेडी में भी छोड़ी छाप
नाना पाटेकर को अगर सिर्फ गंभीर और आक्रामक किरदारों का अभिनेता कहा जाए तो यह उनकी पूरी सिनेमाई यात्रा के साथ न्याय नहीं होगा।
'वेलकम' में उदय शेट्टी के किरदार ने उनकी एक बिल्कुल अलग छवि दर्शकों के सामने रखी। इस फिल्म में उनका हास्य, संवाद बोलने का अंदाज और अनिल कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री बेहद लोकप्रिय हुई।
इससे यह भी साबित हुआ कि नाना पाटेकर दर्शकों को डराने, भावुक करने और सोचने पर मजबूर करने के साथ-साथ उन्हें हंसा भी सकते थे।
राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री से हुए सम्मानित
नाना पाटेकर को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। उनके खाते में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई बड़े सम्मान दर्ज हैं। 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
उनका सम्मान सिर्फ पुरस्कारों तक सीमित नहीं था। अभिनय की दुनिया में उन्हें एक ऐसे कलाकार के तौर पर देखा जाता था, जिनकी स्क्रीन प्रेजेंस अपने आप में काफी होती थी।
सिनेमा से आगे भी थी नाना पाटेकर की पहचान
नाना पाटेकर की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका सामाजिक काम भी रहा। अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ उन्होंने सितंबर 2015 में NAAM Foundation की शुरुआत की थी। इस संस्था का फोकस महाराष्ट्र के किसानों, सूखे से प्रभावित परिवारों, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास से जुड़े कामों पर रहा है। NNaam Foundation+1
NAAM Foundation के मुताबिक संस्था किसानों की मदद के साथ-साथ जल संरक्षण, खेती के आधुनिक तरीकों और गांवों में टिकाऊ विकास पर भी काम करती रही है।
इसलिए नाना पाटेकर की विरासत केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहेगी। एक अभिनेता के तौर पर उनकी फिल्में याद की जाएंगी और सामाजिक कार्यों के लिए भी उन्हें याद किया जाएगा।
आखिरी दौर तक फिल्मों से जुड़े रहे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर उन कलाकारों में थे जिन्होंने उम्र बढ़ने के साथ फिल्मों से दूरी बनाने के बजाय अपने लिए अलग तरह की भूमिकाएं तलाशना जारी रखा। उनकी हालिया फिल्मोग्राफी में 'द वैक्सीन वॉर', 'गदर 2', 'वनवास', 'हाउसफुल 5', 'ओ' रोमियो' और 'सुबेदार' जैसे प्रोजेक्ट शामिल रहे।
जनवरी 2026 में 'ओ' रोमियो' के ट्रेलर लॉन्च से जुड़ा एक कार्यक्रम भी सुर्खियों में रहा था, जब कार्यक्रम में देरी होने के बाद नाना पाटेकर वहां से चले गए थे। उस समय उनकी समय की पाबंदी और काम के प्रति अनुशासन को लेकर भी चर्चा हुई थी।
नाना पाटेकर की आवाज और किरदार हमेशा याद रहेंगे
भारतीय सिनेमा में कई अभिनेता आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ कलाकार अपनी एक ऐसी शैली छोड़ जाते हैं जिसकी नकल करना आसान नहीं होता। नाना पाटेकर उन्हीं कलाकारों में से एक थे।
उनका अभिनय कई बार तेज था, कई बार खामोश। उनके किरदारों में गुस्सा भी दिखा, दर्द भी और आम इंसान की बेचैनी भी। यही वजह है कि नाना पाटेकर का नाम सिर्फ एक सफल अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे कलाकार के रूप में याद किया जाएगा जिसने हिंदी और मराठी सिनेमा में अभिनय की अपनी अलग भाषा बनाई।
75 साल की उम्र में उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा अभिनेता खो दिया है, जिसकी मौजूदगी पर्दे पर आते ही अलग से महसूस होती थी। नाना पाटेकर की फिल्मों के किरदार और उनके बोले हुए संवाद आने वाली पीढ़ियों के दर्शकों को भी उनके अभिनय की याद दिलाते रहेंगे।