{
    "url": "https://prathampost.com/ias-officers-resignation-list-2010-2026",
    "title": "IAS अधिकारियों के इस्तीफे: 2010 से 2026 तक कितने अफसरों ने छोड़ी सेवा और क्यों ?",
    "type": "article",
    "summary": "An article explaining iAS अधिकारियों के इस्तीफे: 2010 से 2026 तक कितने अफसरों ने छोड़ी सेवा और क्यों ?. RTI आंकड़ों के मुताबिक 2010 इस अवधि में सबसे अधिक accepted resignations वाला साल रहा। हाल के वर्षों में IAS अधिकारियों के इस्तीफे के कई चर्चित मामले सामने आए हैं। किसी अधिकारी ने राजनीति का रास्ता चुना, किसी ने निजी क्षेत्र या दूसरे पेशे को अपनाया, तो कुछ मामलों में इस्तीफे की घोषणा के बाद उसे…",
    "direct_answer": "2010 से 2026 के बीच 32 IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं। RTI से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे अधिक accepted resignations पश्चिम बंगाल कैडर से सामने आए। हालांकि यह संख्या उन अधिकारियों को शामिल नहीं करती जिन्होंने इस्तीफा देने के बाद उसे स्वीकार होने से पहले वापस ले लिया। शाह फैसल इसका प्रमुख उदाहरण हैं।",
    "target_question": "किस साल सबसे ज्यादा IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार हुए?",
    "author": {
        "name": "Alka Tiwari",
        "job_title": "Editor in chief",
        "url": "https://prathampost.com/author/alka-tiwari"
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    "published_at": "2026-09-29T15:33:00+05:30",
    "updated_at": "2026-09-30T03:02:30+05:30",
    "freshness_note": "First published 29 September 2026.",
    "category": "भारत",
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        "Kannan Gopinathan",
        "Shah Faesal"
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            "question": "1. 2010 से 2026 तक कितने IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार हुए?",
            "answer": "RTI आधारित जानकारी के अनुसार 2010 से 2026 के बीच 32 IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार हुए।"
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            "question": "2. किस साल सबसे ज्यादा IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार हुए?",
            "answer": "2010 में छह IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार हुए, जो इस अवधि में सबसे अधिक संख्या थी।"
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            "answer": "नहीं। IAS अधिकारी का resignation सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद ही सेवा से बाहर निकलना अंतिम रूप लेता है।"
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            "answer": "नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में resignation वापस लिया जा सकता है। शाह फैसल ने इस्तीफा देने के बाद उसे वापस लिया और 2022 में IAS में लौटे।"
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        {
            "question": "दिव्या मित्तल ने IAS क्यों छोड़ा?",
            "answer": "उन्होंने अगस्त 2026 में IAS से इस्तीफा दिया था। बाद में 29 सितंबर 2026 को राजनीति में प्रवेश की घोषणा की और कहा कि वह उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी।"
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        {
            "question": "क्या दिव्या मित्तल किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हुई हैं?",
            "answer": "29 सितंबर 2026 की उनकी घोषणा के अनुसार उन्होंने फिलहाल किसी राजनीतिक दल के साथ जाने के बजाय नागरिकों के साथ स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने की बात कही है।"
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    "license": "Quotation permitted with attribution and link.",
    "content": "**नई दिल्ली:** भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS को देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवाओं में गिना जाता है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा के जरिए चयनित होने वाले अधिकारी प्रशासन, नीति-निर्माण और सरकार के महत्वपूर्ण कार्यों में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में जब कोई IAS अधिकारी नौकरी छोड़ने का फैसला करता है, तो वह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह जाती, बल्कि अक्सर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाती है।\n\nहाल के वर्षों में IAS अधिकारियों के इस्तीफे के कई चर्चित मामले सामने आए हैं। किसी अधिकारी ने राजनीति का रास्ता चुना, किसी ने निजी क्षेत्र या दूसरे पेशे को अपनाया, तो कुछ मामलों में इस्तीफे की घोषणा के बाद उसे वापस भी लिया गया।\n\nसितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की [IAS अधिकारी दिव्या मित्तल](https://prathampost.com/divya-mittal-politics-entry-uttar-pradesh) का इस्तीफा स्वीकार होने और इसके बाद राजनीति में प्रवेश की घोषणा ने इस पूरे विषय को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।\n\nलेकिन क्या सचमुच बड़ी संख्या में IAS अधिकारी सेवा छोड़ रहे हैं? पिछले वर्षों में कितने अधिकारियों के इस्तीफे वास्तव में स्वीकार हुए? किन अधिकारियों ने नौकरी छोड़ने के बाद राजनीति का रास्ता चुना? और क्या इस्तीफा देना और IAS से बाहर हो जाना एक ही बात है?\n\nइन सवालों का जवाब आंकड़ों और प्रमुख मामलों के जरिए समझते हैं।\n\n## 2010 से 2026 तक 32 IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार\nIndia Today की RTI आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, **2010 से 2026 के बीच 32 IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए।**\n\nइस आंकड़े में अधिकारियों के नाम, कैडर और इस्तीफा स्वीकार होने की तारीख शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा accepted resignations दर्ज हुए। इसके बाद महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक जैसे कैडर भी इस सूची में प्रमुखता से सामने आते हैं।\n\nलेकिन इस आंकड़े को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है।\n\n**32 का मतलब यह नहीं है कि 2010 से 2026 के बीच केवल 32 IAS अधिकारियों ने इस्तीफा देने की कोशिश की।**\n\nयह संख्या उन मामलों की है जहां इस्तीफा अंततः स्वीकार हुआ। सरकार ने RTI के जवाब में यह भी कहा कि ऐसे अधिकारियों का केंद्रीय रूप से compiled data उपलब्ध नहीं है जिन्होंने इस्तीफा जमा करने के बाद उसे वापस ले लिया।\n\nयानी किसी अधिकारी द्वारा इस्तीफा देना और उसका अंतिम रूप से स्वीकार होना दो अलग घटनाएं हो सकती हैं।\n\n## किस साल सबसे ज्यादा IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार हुए?\nRTI आंकड़ों के मुताबिक 2010 इस अवधि में सबसे अधिक accepted resignations वाला साल रहा।\n\n**2010 में छह IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए।**\n\nइसके बाद अधिकांश वर्षों में संख्या एक से चार के बीच रही। 2018 में चार और 2024 में तीन इस्तीफे स्वीकार हुए।\n\nइससे यह भी पता चलता है कि IAS resignations लगातार बढ़ते हुए एक समान trend में नहीं रहे। उपलब्ध आंकड़ों में अलग-अलग वर्षों में संख्या ऊपर-नीचे होती रही है।\n\nइसलिए केवल हाल के कुछ चर्चित मामलों के आधार पर यह कहना कि IAS अधिकारियों के बीच बड़े पैमाने पर नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति शुरू हो गई है, उपलब्ध आंकड़ों से सीधे साबित नहीं होता।\n\n## Verified prominent IAS resignation cases\nनीचे उन प्रमुख मामलों को रखा गया है जिनके बारे में इस्तीफे या उसकी स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने वाली विश्वसनीय रिपोर्टें उपलब्ध हैं।\n\nअधिकारीबैच/कैडरइस्तीफा/स्वीकृतिबाद की स्थिति**दिव्या मित्तल**2013, उत्तर प्रदेशइस्तीफा अगस्त 2026; सितंबर में स्वीकारराजनीति में प्रवेश की घोषणा**अभिषेक सिंह**2011, उत्तर प्रदेशइस्तीफा 2023; 29 फरवरी 2024 को स्वीकारसार्वजनिक जीवन/राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी चर्चा**O.P. चौधरी**2005, छत्तीसगढ़2018इस्तीफे के बाद BJP में शामिल**कन्नन गोपीनाथन**2012, AGMUT2019 में इस्तीफा; लंबे समय तक लंबितइस्तीफा स्वीकार न होने के कारण सेवा स्थिति विवादित रही**शाह फैसल**2010, जम्मू-कश्मीर2019 में इस्तीफा; बाद में वापस लिया2022 में IAS में वापसी**कर्नैल सिंह**2015, पंजाबअप्रैल 2024 में इस्तीफाइस्तीफे के समय स्वीकृति प्रक्रिया जारी थी**परंपाल कौर सिद्धू**2011, पंजाब2024 में इस्तीफा/VRS प्रक्रियाBJP में शामिल होकर 2024 लोकसभा चुनाव लड़ा**नोट:** यह 32 अधिकारियों की संपूर्ण RTI सूची नहीं, बल्कि उपलब्ध विश्वसनीय सार्वजनिक स्रोतों से सत्यापित प्रमुख मामलों की सूची है।\n\n## 1. दिव्या मित्तल: IAS से राजनीति तक\n2026 में सबसे चर्चित IAS resignation cases में उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की अधिकारी दिव्या मित्तल का नाम प्रमुख है।\n\nदिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। बाद में उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया और उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने की अधिसूचना जारी हुई थी।\n\nदिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश में जिलाधिकारी समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं। मिर्जापुर में जिलाधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान दूरदराज के गांव में पाइप से पेयजल पहुंचाने की पहल को भी व्यापक चर्चा मिली थी।\n\nलेकिन उनका इस्तीफा चर्चा में तब और आया जब 29 सितंबर 2026 को उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपने अगले कदम की घोषणा की।\n\nदिव्या मित्तल ने कहा कि वह **राजनीति में प्रवेश करेंगी और अपनी राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू करेंगी।** उन्होंने फिलहाल किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय नागरिकों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने की बात कही।\n\nउन्होंने प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर स्कूलों, जमीन, सड़क, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के implementation से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया।\n\nइस मामले की खास बात यह है कि यहां IAS से बाहर निकलने के बाद सीधे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन की दिशा दिखाई देती है।\n\n## 2. अभिषेक सिंह: IAS से सार्वजनिक जीवन की ओर\nउत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक सिंह का इस्तीफा भी हाल के चर्चित मामलों में रहा।\n\nउन्होंने 2023 में इस्तीफा दिया था और केंद्र सरकार ने उनका resignation 29 फरवरी 2024 से प्रभावी माना। भारत सरकार के राजपत्र में भी राष्ट्रपति द्वारा उनके इस्तीफे को स्वीकार किए जाने की अधिसूचना प्रकाशित हुई।\n\nअभिषेक सिंह प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ मनोरंजन और सोशल मीडिया गतिविधियों के कारण भी सार्वजनिक चर्चा में रहे।\n\nउनके इस्तीफे के बाद 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान उनके राजनीति में आने की चर्चा हुई। हालांकि इस्तीफा स्वीकार होना और चुनाव लड़ना दो अलग घटनाएं हैं।\n\nउनका मामला यह बताता है कि IAS से बाहर निकलने के बाद किसी अधिकारी का करियर जरूरी नहीं कि सिर्फ प्रशासन से जुड़े क्षेत्र में ही आगे बढ़े।\n\n## 3. O.P. चौधरी: IAS के बाद सक्रिय राजनीति\nछत्तीसगढ़ कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी **O.P. चौधरी** ने 2018 में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया।\n\nउस समय वह रायपुर के कलेक्टर थे। इस्तीफे के तुरंत बाद उन्होंने BJP ज्वाइन कर ली और सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। Indian Express और NDTV की उस समय की रिपोर्टों में उनके इस्तीफे और राजनीतिक प्रवेश का विवरण प्रकाशित हुआ था।\n\nचौधरी का मामला IAS से राजनीति में जाने के उदाहरणों में अक्सर उद्धृत किया जाता है।\n\nयहां भी एक महत्वपूर्ण पत्रकारिता बिंदु है—उनका राजनीति में प्रवेश इस्तीफे के बाद हुआ, इसलिए इसे “IAS रहते राजनीति में प्रवेश” के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।\n\n## 4. कन्नन गोपीनाथन: इस्तीफा दिया, लेकिन स्वीकार नहीं हुआ\nकन्नन गोपीनाथन का मामला IAS resignation की प्रक्रिया समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।\n\n2012 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी गोपीनाथन ने अगस्त 2019 में इस्तीफा दिया था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में restrictions और freedom of expression से जुड़े मुद्दों को अपने फैसले के संदर्भ में रखा था।\n\nलेकिन उनका इस्तीफा लंबे समय तक स्वीकार नहीं हुआ।\n\nमार्च 2026 में Indian Express ने रिपोर्ट किया कि उनका resignation अभी भी लंबित था और सरकारी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी कानूनी और प्रशासनिक स्थिति जटिल बनी हुई थी।\n\nयह मामला एक महत्वपूर्ण सवाल सामने लाता है:\n\n**क्या इस्तीफा देने के बाद कोई IAS अधिकारी तुरंत राजनीति में जा सकता है?**\n\nजवाब सीधा नहीं है।\n\nजब तक इस्तीफा स्वीकार नहीं होता और अधिकारी सेवा से बाहर नहीं होता, वह सरकारी सेवा के conduct rules के अधीन रहता है। All India Services Conduct Rules में सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े प्रतिबंध हैं।\n\n## 5. शाह फैसल: इस्तीफा वापस लेकर IAS में वापसी\nशाह फैसल का मामला इससे बिल्कुल अलग है।\n\n2010 बैच के IAS अधिकारी और UPSC Civil Services Examination के topper रहे शाह फैसल ने जनवरी 2019 में इस्तीफा दिया था। इसके बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया।\n\nलेकिन उनका इस्तीफा लंबे समय तक final नहीं हुआ।\n\nबाद में उन्होंने resignation वापस ले लिया और 2022 में सरकार ने उनकी वापसी स्वीकार की। इसके बाद उन्हें फिर से IAS में शामिल किया गया और Tourism Ministry में जिम्मेदारी मिली।\n\nइसलिए शाह फैसल का नाम **32 accepted resignations** की सूची में नहीं आता।\n\nयह उदाहरण बताता है कि “IAS officer resigned” और “IAS officer permanently left service” को एक ही बात मानना सही नहीं है।\n\n## 6. कर्नैल सिंह: पोस्टिंग के बाद इस्तीफा\nपंजाब कैडर के 2015 बैच के IAS अधिकारी कर्नैल सिंह ने अप्रैल 2024 में इस्तीफा दिया।\n\nवह जनवरी 2024 में कपूरथला के Deputy Commissioner पद से हटाए गए थे और उसके बाद उन्हें नई posting नहीं मिली थी। Indian Express ने उस समय रिपोर्ट किया कि उनकी resignation के पीछे posting से जुड़ा घटनाक्रम चर्चा में था।\n\nहालांकि बाद की रिपोर्टों में कर्नैल सिंह ने कहा था कि वह राजनीति में नहीं जा रहे हैं और उनके निर्णय के पीछे निजी परिस्थितियां भी थीं। उस समय उनका इस्तीफा स्वीकार होने की प्रक्रिया जारी थी।\n\nइसलिए उनके मामले को सीधे “posting से नाराज होकर इस्तीफा” कहना उचित नहीं होगा। \n\n## 7. परंपाल कौर सिद्धू: इस्तीफा, VRS और चुनावी राजनीति\nपंजाब कैडर की 2011 बैच की IAS अधिकारी परंपाल कौर सिद्धू का मामला 2024 में सामने आया।\n\nउन्होंने सेवा छोड़ने के लिए इस्तीफा और VRS से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद वह BJP में शामिल हुईं और 2024 लोकसभा चुनाव में बठिंडा से उम्मीदवार बनीं।\n\nउस समय पंजाब सरकार ने उनके resignation को तुरंत स्वीकार नहीं किया था और उन्हें duty resume करने का निर्देश भी दिया गया था। Indian Express ने मई 2024 में इस विवाद की रिपोर्ट की थी।\n\n## IAS अधिकारी इस्तीफा कैसे देता है?\nIAS resignation की प्रक्रिया सामान्य नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया जैसी नहीं है।\n\nIndian Express की 2026 की explainer रिपोर्ट के मुताबिक All India Services के resignation मामलों पर **All India Services (Death-cum-Retirement Benefits) Rules, 1958** लागू होते हैं।\n\nCadre में serving officer अपना resignation संबंधित राज्य के Chief Secretary को देता है। Central deputation पर मौजूद अधिकारी को संबंधित ministry/department के Secretary के माध्यम से प्रक्रिया शुरू करनी होती है।\n\nइसके बाद संबंधित स्तर पर dues, vigilance और disciplinary matters जैसी चीजों की जांच की जाती है और मामला केंद्र सरकार के स्तर तक पहुंच सकता है।\n\nIAS के मामले में competent authority के स्तर पर Department of Personnel and Training की भूमिका होती है।\n\nयानी:\n\n**Resignation letter → scrutiny → state/cadre process → central process → acceptance**\n\nऔर तभी अधिकारी की सेवा समाप्ति अंतिम रूप लेती है।\n\n## क्या IAS अधिकारी इस्तीफा वापस ले सकता है?\nकुछ परिस्थितियों में हां।\n\nइसीलिए resignation और acceptance के बीच का समय महत्वपूर्ण है।\n\nसरकारी नियमों में resignation withdrawal की व्यवस्था मौजूद है। शाह फैसल इसका प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने 2019 में इस्तीफा दिया था लेकिन बाद में resignation वापस लेकर सेवा में वापसी की।\n\nदूसरी तरफ सरकार के RTI जवाब में यह भी सामने आया कि ऐसे अधिकारियों का centralized data उपलब्ध नहीं है जिन्होंने resignation देने के बाद उसे वापस ले लिया।\n\nइसलिए 32 का आंकड़ा IAS अधिकारियों के resignations की पूरी तस्वीर नहीं है।\n\nयह **accepted resignations का आंकड़ा** है।\n\n## Resignation और VRS में क्या अंतर है?\nयह अंतर भी समझना जरूरी है।\n\n### Resignation\nअधिकारी अपनी सेवा से इस्तीफा देता है और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद सेवा समाप्त होती है।\n\n### VRS\nVoluntary Retirement Scheme के तहत अधिकारी निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर समय से पहले retirement लेता है।\n\nदोनों प्रक्रियाओं को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।\n\nपरंपाल कौर सिद्धू के मामले में resignation और VRS दोनों का संदर्भ सामने आया था। इसी तरह दूसरे अधिकारियों के मामलों में भी service exit का रास्ता अलग-अलग रहा है।\n\n## IAS अधिकारी नौकरी क्यों छोड़ते हैं?\nपिछले वर्षों के चर्चित मामलों को एक साथ देखें तो कोई एक कारण सामने नहीं आता।\n\n### 1. राजनीति में प्रवेश\nO.P. चौधरी, परंपाल कौर सिद्धू और अब दिव्या मित्तल जैसे मामलों में IAS से बाहर निकलने के बाद राजनीति सार्वजनिक रूप से सामने आई।\n\n### 2. वैचारिक या नीतिगत कारण\nकन्नन गोपीनाथन ने 2019 में जम्मू-कश्मीर की स्थिति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को अपने इस्तीफे के संदर्भ में रखा था।\n\n### 3. निजी कारण\nकुछ अधिकारियों ने resignation के समय निजी कारणों का उल्लेख किया।\n\nअभिषेक सिंह ने भी अपने resignation के संदर्भ में personal reasons का उल्लेख किया था।\n\n### 4. करियर का दूसरा रास्ता\nकुछ अधिकारी private sector, entrepreneurship, entertainment या अन्य पेशेवर क्षेत्रों में गए।\n\n### 5. प्रशासनिक परिस्थितियां\nकुछ मामलों में transfer, posting या service-related घटनाक्रम resignation की पृष्ठभूमि में रहे हैं।\n\nइसलिए सभी resignations को एक ही कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा।\n\n## पिछले वर्षों में चर्चित IAS resignation cases\n\n### 2010\nRTI के अनुसार इस अवधि में सबसे ज्यादा—**छह—accepted resignations** दर्ज हुए।\n\n### 2018\nO.P. चौधरी ने IAS से इस्तीफा दिया और इसके बाद BJP में शामिल हुए।\n\n### 2019\nशाह फैसल ने इस्तीफा दिया और राजनीति में गए, लेकिन बाद में resignation वापस लेकर IAS में लौटे।\n\nइसी वर्ष कन्नन गोपीनाथन ने भी इस्तीफा दिया, लेकिन उनका resignation लंबे समय तक लंबित रहा।\n\n### 2023\nअभिषेक सिंह ने IAS से इस्तीफा दिया।\n\n### 2024\nअभिषेक सिंह का resignation 29 फरवरी 2024 से प्रभावी हुआ।\n\nइसी वर्ष पंजाब में परंपाल कौर सिद्धू और कर्नैल सिंह के resignation cases भी चर्चा में रहे।\n\n### 2026\nदिव्या मित्तल ने IAS से इस्तीफा दिया। सितंबर में resignation स्वीकार हुआ। इसके बाद 29 सितंबर को उन्होंने राजनीति में प्रवेश की घोषणा की और उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही।\n\n## क्या IAS अधिकारियों के इस्तीफे बढ़ रहे हैं?\nयह सवाल स्वाभाविक है, लेकिन इसका जवाब सावधानी से देना होगा।\n\nRTI आंकड़ों के मुताबिक 2010 से 2026 के बीच 32 इस्तीफे स्वीकार हुए। 2010 में छह, 2018 में चार और 2024 में तीन resignations accepted हुए। बाकी अधिकांश वर्षों में संख्या एक से चार के बीच रही।\n\nइसलिए उपलब्ध data से यह निष्कर्ष सीधे नहीं निकाला जा सकता कि IAS officers के resignations लगातार बढ़ रहे हैं।\n\nइसके अलावा IAS cadre के कुल आकार के मुकाबले 32 accepted resignations को देखना होगा। केवल absolute number से trend निर्धारित नहीं किया जा सकता।\n\nएक और limitation यह है कि resignation देकर उसे वापस लेने वाले अधिकारियों का consolidated central record उपलब्ध नहीं है।\n\nइसलिए बेहतर निष्कर्ष यह है कि **IAS resignations होते रहे हैं, लेकिन उपलब्ध आंकड़े अपने आप में किसी व्यापक resignation wave को साबित नहीं करते।**\n\n## IAS छोड़ने के बाद क्या करते हैं अधिकारी?\nइन मामलों को देखने पर अलग-अलग रास्ते दिखाई देते हैं।\n\nकुछ राजनीति में गए।\n\nकुछ ने सार्वजनिक जीवन चुना।\n\nकुछ निजी क्षेत्र में गए।\n\nकुछ ने entrepreneurship का रास्ता अपनाया।\n\nकुछ मामलों में अधिकारियों ने इस्तीफा वापस लिया और फिर सरकारी सेवा में लौट आए।\n\nशाह फैसल का मामला इसकी सबसे स्पष्ट मिसाल है, जबकि O.P. चौधरी और परंपाल कौर सिद्धू के मामले सक्रिय राजनीति की दिशा दिखाते हैं। दिव्या मित्तल ने 2026 में स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने की बात कही है।\n\nइसलिए IAS छोड़ने के बाद की यात्रा हर अधिकारी के लिए अलग रही है।\n\n## दिव्या मित्तल का मामला क्यों महत्वपूर्ण है?\nदिव्या मित्तल का मामला इस पूरी बहस को 2026 के संदर्भ में जोड़ता है।\n\nउन्होंने लगभग 13 साल प्रशासनिक सेवा में बिताए। सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने यह स्पष्ट करने के लिए वीडियो जारी किया कि उनका अगला कदम क्या होगा।\n\n29 सितंबर 2026 को जारी वीडियो में उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा की और कहा कि उत्तर प्रदेश उनकी राजनीतिक यात्रा का शुरुआती बिंदु होगा।\n\nउन्होंने किसी राजनीतिक दल में तत्काल शामिल होने के बजाय जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करने की बात कही।\n\nउन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर सरकारी योजनाओं के implementation, शिक्षा, स्कूल, जमीन, सड़क, युवाओं और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बात की।\n\nहालांकि अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह घोषित नहीं हुआ है कि वह 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी विशेष सीट से चुनाव लड़ेंगी।\n\nइसलिए उनके बारे में फिलहाल इतना ही तथ्यात्मक रूप से कहा जा सकता है कि **उन्होंने राजनीति में प्रवेश की घोषणा की है और उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही है।**\n\n## 32 इस्तीफों की कहानी एक जैसी नहीं\n2010 से 2026 के बीच 32 IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार होने का RTI आंकड़ा भारतीय प्रशासनिक सेवा से बाहर निकलने के कुछ मामलों की तस्वीर जरूर देता है।\n\nलेकिन इन 32 मामलों को एक ही नजरिए से देखना सही नहीं होगा।\n\nकिसी ने राजनीति चुनी, किसी ने दूसरा career, किसी ने निजी कारणों से सेवा छोड़ी और कुछ ऐसे मामले भी रहे जहां resignation वापस लिया गया या लंबे समय तक स्वीकार नहीं हुआ।\n\nदिव्या मित्तल का मामला इसी कहानी की नई कड़ी है। उन्होंने IAS से बाहर निकलने के बाद अब राजनीति में प्रवेश की घोषणा की है और उत्तर प्रदेश को अपनी राजनीतिक यात्रा का शुरुआती क्षेत्र बताया है।\n\nवहीं शाह फैसल और कन्नन गोपीनाथन के मामले यह याद दिलाते हैं कि **इस्तीफा देना और सेवा से औपचारिक रूप से बाहर होना एक ही बात नहीं है।**\n\nयही वजह है कि IAS resignation के आंकड़ों को पढ़ते समय “इस्तीफा दिया”, “इस्तीफा स्वीकार हुआ”, “इस्तीफा वापस लिया” और “VRS लिया”—इन चारों को अलग-अलग समझना जरूरी है।\n\nउपलब्ध RTI आंकड़ों के आधार पर फिलहाल सबसे सटीक तस्वीर यही है कि पिछले 16 वर्षों में IAS अधिकारियों के कुछ दर्जनों resignation अंतिम रूप से स्वीकार हुए हैं, लेकिन इन मामलों के पीछे कारण और बाद की राह अलग-अलग रही है।\n\nऔर शायद यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—**IAS छोड़ने वाले हर अधिकारी की कहानी अलग है।**"
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