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    "title": "दुश्मनों का काल बनेगी A - 203 राइफल, यूपी के अमेठी में हो रहा निर्माण",
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    "summary": "A news report on दुश्मनों का काल बनेगी A - 203 राइफल, यूपी के अमेठी में हो रहा निर्माण. AK-203 पहले से ही भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का एक अहम प्रोजेक्ट है। अमेठी में इसका निर्माण करने के लिए भारत और रूस की साझेदारी में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) बनाई गई थी। सरकार के मुताबिक, कंपनी को अमेठी के कोरवा में AK-203 के उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश का अमेठी जिला अब…",
    "direct_answer": "AK-203 पहले से ही भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का एक अहम प्रोजेक्ट है। अमेठी में इसका निर्माण करने के लिए भारत और रूस की साझेदारी में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) बनाई गई थी। सरकार के मुताबिक, कंपनी को अमेठी के कोरवा में AK-203 के उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश का अमेठी जिला अब भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए बड़ा नाम बनने जा रहा है। यहां अब जल्द ही AK-203 ‘शेर’ असॉल्ट राइफल का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जाएगा। शुरुआती फायरिंग टेस्ट के नतीजे…",
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            "question": "अमेठी में तैयार ‘शेर’ की खासियत क्या है?",
            "answer": "AK-203, कलाश्निकोव प्लेटफॉर्म पर आधारित 7.62x39mm असॉल्ट राइफल है। इसमें आधुनिक एक्सेसरी रेल और अपडेटेड एर्गोनॉमिक्स जैसी खूबियां दी गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार इसकी फायरिंग क्षमता करीब 700 राउंड प्रति मिनट और प्रभावी रेंज करीब 800 मीटर बताई जाती है।"
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    "content": "उत्तर प्रदेश का अमेठी जिला अब भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए बड़ा नाम बनने जा रहा है। यहां अब जल्द ही **AK-203 ‘शेर’ असॉल्ट राइफल **का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जाएगा। शुरुआती फायरिंग टेस्ट के नतीजे शानदार रहे हैं। \n\n## अमेठी जिले की पहचान से जुड़ेगा नया नाम\nभारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी खबर सामने\r\nआई है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा स्थित इंडो-रशियन\r\nराइफल्स प्राइवेट लिमिटेड ([IRRPL](https://irrpl.co.in/)) की फैक्ट्री\r\nमें पहली पूरी तरह स्वदेशी AK-203 ‘शेर’ असॉल्ट\r\nराइफल तैयार कर ली गई है।  \n\nइस राइफल का फायरिंग टेस्ट किया गया है। शुरुआती टेस्ट में इस राइफल के नतीजे उत्साहवर्धक रहे हैं।  खास\r\nबात यह है कि इस राइफल के हर कंपोनेंट और इनपुट मटीरियल को भारतीय उद्योग से लिया\r\nगया है। \n\nअब इस राइफल के प्रोटोटाइप भारतीय सेना के\r\nपरीक्षण के लिए तैयार किए जा रहे हैं। मौजूदा जानकारी के मुताबिक, सितंबर\r\n2026 में सेना के ट्रायल के लिए\r\nस्वदेशी AK-203 के प्रोटोटाइप सौंपे जाने की तैयारी है।\n\nहरी झंडी मिलते ही इस राइफल का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो जाएगा। \n\n## AK-203 ‘शेर’ को लेकर इतनी चर्चा क्यों?\nAK-203 पहले से ही भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का एक\r\nअहम प्रोजेक्ट है। अमेठी में इसका निर्माण करने के लिए भारत और रूस की साझेदारी\r\nमें इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) बनाई गई थी। सरकार के मुताबिक, कंपनी\r\nको अमेठी के कोरवा में AK-203 के उत्पादन की\r\nजिम्मेदारी दी गई है।\n\nलेकिन अब जो उपलब्धि सामने आई है, वह\r\nसामान्य उत्पादन से अलग है। पहली बार तैयार की गई इस राइफल में 100 फीसदी\r\nभारतीय कंपोनेंट और कच्चे माल का इस्तेमाल\r\nकिया गया है। यानी यह सिर्फ कुछ पुर्जों को भारत में बनाने की बात नहीं है,\r\nबल्कि पूरी उत्पादन श्रृंखला में भारतीय उद्योग की भागीदारी का दावा\r\nकिया गया है।\n\n[https://twitter.com/Defencecore/status/2090481655958192236](https://twitter.com/Defencecore/status/2090481655958192236)\n\n## अमेठी में तैयार ‘शेर’ की खासियत क्या है?\nAK-203, कलाश्निकोव प्लेटफॉर्म पर आधारित 7.62x39mm\r\nअसॉल्ट राइफल है। इसमें आधुनिक एक्सेसरी रेल और अपडेटेड एर्गोनॉमिक्स\r\nजैसी खूबियां दी गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार इसकी फायरिंग क्षमता करीब 700\r\nराउंड प्रति मिनट और प्रभावी रेंज करीब 800 मीटर\r\nबताई जाती है।\n\nभारतीय सेना में इसे पुरानी INSAS राइफलों\r\nके स्थान पर शामिल किए जाने की योजना है। ऐसे में बड़े पैमाने\r\nपर इसका स्वदेशी उत्पादन सेना के छोटे हथियारों के आधुनिकीकरण से भी जुड़ा हुआ है।\n\n## 6 लाख से ज्यादा राइफलों का बड़ा ऑर्डर\nAK-203 प्रोजेक्ट का पैमाना भी काफी बड़ा है। रक्षा\r\nमंत्रालय के मुताबिक, दिसंबर 2021 में\r\nभारत सरकार और IRRPL के बीच 6,01,427 AK-203 असॉल्ट\r\nराइफलों की खरीद का अनुबंध हुआ था। इन राइफलों का उत्पादन\r\nअमेठी के कोरवां में किया जाना है।\n\nयही वजह है कि अमेठी की फैक्ट्री में स्वदेशीकरण\r\nबढ़ने का असर आने वाले समय में बड़े पैमाने के उत्पादन पर भी पड़ सकता है।\n\n## अब हर 100 सेकंड\r\nमें एक AK-203 बनाने का लक्ष्य\nIRRPL अब उत्पादन की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में भी काम\r\nकर रही है। कंपनी के मुताबिक, जल्द ही हर 100\r\nसेकंड में एक AK-203 ‘शेर’ राइफल बनाने\r\nकी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। कंपनी ने उत्पादन प्रक्रिया में सुधार और\r\nस्वदेशी कंपोनेंट के इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ सेना को करीब 6 लाख\r\nराइफलों की डिलीवरी तय समय से लगभग एक साल पहले पूरी करने की बात भी कही है।\n\n![AK 203 ](https://prathampost.com/uploads/2026/08/ak-203-0229c2.webp)\n## सितंबर में होगा सैन्य परीक्षण\nअभी सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण भारतीय सेना का\r\nट्रायल है। अमेठी में तैयार पहली स्वदेशी AK-203 का\r\nशुरुआती फायरिंग टेस्ट पूरा हो चुका है, लेकिन सेना में\r\nबड़े पैमाने पर शामिल किए जाने से पहले इसके प्रोटोटाइप का सैन्य परीक्षण होना\r\nबाकी है।\n\nसितंबर 2026 में\r\nहोने वाले इन ट्रायल के दौरान राइफल के प्रदर्शन को सेना की तय आवश्यकताओं के\r\nअनुसार परखा जाएगा। इसके बाद ही इसके आगे के उत्पादन और व्यापक इस्तेमाल को लेकर\r\nतस्वीर और साफ होगी।\n\n## भारत के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?\nAK-203 ‘शेर’ की कहानी सिर्फ एक नई राइफल के निर्माण तक\r\nसीमित नहीं है। इसका सबसे बड़ा पहलू यह है कि भारत अब इस हथियार के उत्पादन में\r\nविदेशी कंपोनेंट पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।\n\n2018 में भारत और रूस के बीच AK-203 के\r\nभारत में निर्माण को लेकर समझौता हुआ था और 2019 में IRRPL\r\nका गठन किया गया। इसके बाद अमेठी में उत्पादन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।\r\nअब 100 फीसदी भारतीय कंपोनेंट वाली राइफल का सफल परीक्षण\r\nइस परियोजना के स्वदेशीकरण के अगले चरण को दिखाता है।\n\nफिलहाल देखा जाए तो अमेठी की फैक्ट्री में\r\nअब AK-203 सिर्फ ‘भारत में बन’ नहीं रही, बल्कि\r\nउसके निर्माण में भारतीय उद्योग की हिस्सेदारी भी पूरी तरह बढ़ाने की कोशिश हो रही\r\nहै। अब सितंबर में भारतीय सेना के ट्रायल पर नजर रहेगी।\r\nअगर राइफल इन परीक्षणों में भी खरी उतरती है, तो\r\nअमेठी से बड़ी संख्या में स्वदेशी AK-203 की सप्लाई का\r\nरास्ता और मजबूत हो सकता है।\n\n### FAQ: AK-203 ‘शेर’ से जुड़े सवाल\nAK-203 ‘शेर’ कहां बनाई गई है?\n\nAK-203 ‘शेर’ का स्वदेशी प्रोटोटाइप उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा प्लांट में तैयार किया गया है।क्या AK-203 ‘शेर’\r\nपूरी तरह स्वदेशी है?\n\nपहली पूरी तरह स्वदेशी राइफल के बारे में IRRPL ने कहा है कि इसमें सभी कंपोनेंट और इनपुट मटीरियल भारतीय उद्योग से लिए गए हैं।AK-203 का सेना में क्या इस्तेमाल होगा?\n\nइसे भारतीय सेना की पुरानी INSAS राइफलों के स्थान पर शामिल करने की योजना है।भारतीय सेना को AK-203 कब\r\nमिलेगी?\n\nपहले स्वदेशी प्रोटोटाइप के सेना ट्रायल के लिए सितंबर 2026 का लक्ष्य बताया गया है। व्यापक डिलीवरी का समय ट्रायल और आगे की प्रक्रिया पर निर्भर\r\nकरेगा।\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\nभारत ने कितनी AK-203 राइफलों\r\nका ऑर्डर दिया है?\n\nदिसंबर 2021 में 6,01,427 AK-203 राइफलों की खरीद का अनुबंध किया गया था।\n##"
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